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"प्यास"

प्यास कहाँ है?
गिलास मेंं
मटके में
या
फिर लोटे में भी नहीं है ।
हां
सकोरे में भरे हुआ
पानी में
प्यास है ।
"गौरैया"  अपनी चोंच से
अपनी प्यास बुझाती ।

अनिल कुमार सोनी


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जेब खाली ! जुबान खाली ! जिग़र के अरमान खाली ! खेल खाली ! खेत खाली ! खलिहान खाली ! कुठिया का अनाज खा ली ! हुआ न खाली डब्बा । खाली बोतलें ले लो मेरे यार खाली से सब नफरत करता खाली है किसान खाली डब्बा "मुद्राविहीन देश की जनता सेअराजकता फैलती है"। अनिल कुमार सोनी

हम देखेंगे, हमारी आदत हो गई है ?

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