जागो हे वीर
भारतीय
भौर हुई
सूरज निकल आया है
सुबह हुई
कोयल कूकी
कौवा बोलें
पवन चले पुरवाई है
जागो हे वीर
भारतीय
भौर हुई ।
रचनाकार
अनिलकुमार सोनी
जेब खाली ! जुबान खाली ! जिग़र के अरमान खाली ! खेल खाली ! खेत खाली ! खलिहान खाली ! कुठिया का अनाज खा ली ! हुआ न खाली डब्बा । खाली बोतलें ले लो मेरे यार खाली से सब नफरत करता खाली है किसान खाली डब्बा "मुद्राविहीन देश की जनता सेअराजकता फैलती है"। अनिल कुमार सोनी
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