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"सुप्रभात"

जागो हे वीर भारतीय भौर हुई सूरज निकल आया है सुबह हुई कोयल कूकी कौवा बोलें पवन चले पुरवाई है जागो हे वीर भारतीय भौर हुई । रचनाकार अनिलकुमार सोनी

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"देश की नब्ज और किसान"

जेब खाली ! जुबान खाली ! जिग़र के अरमान खाली ! खेल खाली ! खेत खाली ! खलिहान खाली ! कुठिया का अनाज खा ली ! हुआ न खाली डब्बा । खाली बोतलें ले लो मेरे यार खाली से सब नफरत करता खाली है किसान खाली डब्बा "मुद्राविहीन देश की जनता सेअराजकता फैलती है"। अनिल कुमार सोनी

हम देखेंगे, हमारी आदत हो गई है ?

खून खौलता  है उस मां का जिसका लाल शहीद  हुआ ! खून खौलता  है उस पिता का जिसका लाल शहीद  हुआ ! खून खौलता  है उस भाई का जिसका भाई शहीद  हुआ खून खौलता  है उस पत्नी का जिसका सुहाग शहीद  हुआ ! खून खौलता  है उस दादा का जिसका नाती शहीद  हुआ ! हम देखेंगे, हमारी आदत हो गई है ? अनिलकुमार सोनी