ओम नम: शिवाय्
कहता चल
जीवन की डोर
इनके हाथ ही है ।
जय श्री राम
भजता चल
भवसागर से पार होना भी
इनके हाथ ही है ।
मनकी बात
तू करता चल
नैया पार लगना भी
इनके हाथ ही है ।
भूल न जाना राम को
धनश्याम को
सबका मालिक एक है
"ओम नम: शिवाय"
जेब खाली ! जुबान खाली ! जिग़र के अरमान खाली ! खेल खाली ! खेत खाली ! खलिहान खाली ! कुठिया का अनाज खा ली ! हुआ न खाली डब्बा । खाली बोतलें ले लो मेरे यार खाली से सब नफरत करता खाली है किसान खाली डब्बा "मुद्राविहीन देश की जनता सेअराजकता फैलती है"। अनिल कुमार सोनी
खून खौलता है उस मां का जिसका लाल शहीद हुआ ! खून खौलता है उस पिता का जिसका लाल शहीद हुआ ! खून खौलता है उस भाई का जिसका भाई शहीद हुआ खून खौलता है उस पत्नी का जिसका सुहाग शहीद हुआ ! खून खौलता है उस दादा का जिसका नाती शहीद हुआ ! हम देखेंगे, हमारी आदत हो गई है ? अनिलकुमार सोनी
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